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रात हो गयी है

  • Writer: Shreyas Khopkar
    Shreyas Khopkar
  • Jan 10, 2019
  • 1 min read

रात हो गयी है

उन अपनों का इंतजार करते करते

जो कभी अपने हुआ करते थे

उनकी आहट अब आशाएं हैं

उनकी चहक अब सपने हैं

उनका दीदार अब मुश्किल है

उनका साथ अब ख्वाबों में हैं

जब कभी टकराती उनकी यादें हैं

लौट आती ज़हन में वो भूली बिसरी रातें हैं

मगर इस मझदार में अपने हुए पराए

अब हम स्वयं ही खुद के हुए सहारे

पहले होती थी अविराम चर्चाएँ

अब न होती चंद भी बातें

क्योंकि अब इस जीवन में ‘ रात हो गई है ’

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